बांकी मोंगरा (छत्तीसगढ़): कटघोरा के पूर्व पार्षद पर पुलिस का डर दिखाकर 1.20 लाख रुपए ऐंठने की लिखित शिकायत।- पीड़ित पिता ने दर्ज कराई शिकायत: 'पुलिस से सेटिंग' के नाम पर लिए थे रुपए, बेटा फिर भी गया जेल।
- पेन ड्राइव में ऑडियो-वीडियो सबूत संलग्न: एसपी कोरबा, आईजी बिलासपुर रेंज और बांकी मोंगरा पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग।
पूरा मामला: 'थानों में उठना-बैठना है' कहकर बिछाया ठगी का जाल
कोरबा / बांकी मोंगरा।
कोरबा जिले के बांकी मोंगरा थाना क्षेत्र में पुलिस और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर ठगी करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सुराकछार बस्ती निवासी सुरेश चंद (पिता- अर्जुन दास) ने कटघोरा के नेहरू नगर से पूर्व पार्षद रविन्द्र मोहन बघेल (पिता- जगमोहन दास, निवासी छिर्रा) के खिलाफ पुलिस अधीक्षक (SP) कोरबा को लिखित शिकायत सौंपकर कार्रवाई की गुहार लगाई है।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित सुरेश चंद के बेटे साहिल कुमार के विरुद्ध बांकी मोंगरा थाने में एक युवती द्वारा शारीरिक शोषण/दुष्कर्म की शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसकी भनक लगते ही पूर्व पार्षद रविन्द्र मोहन बघेल ने पीड़ित पिता से संपर्क साधा। उसने खुद की पुलिस विभाग और विभिन्न थानों में गहरी पहुंच ("मेरा सभी थानों में उठना-बैठना है") का दावा करते हुए डराया कि पुलिस उनके बेटे को जल्द गिरफ्तार कर लेगी।
पूर्व पार्षद ने दावा किया कि यदि वे 1,50,000 रुपये देंगे, तो वह बांकी मोंगरा थाने में बात करके शिकायत को समाप्त करवा देगा और बेटे को जेल जाने से बचा लेगा।
किश्तों में वसूले 1.50 लाख, फिर भी पुलिस ने कर लिया गिरफ्तार।
पुलिस कार्रवाई के डर से बदहवास पिता ने पूर्व पार्षद के झांसे में आकर किश्तों में रकम का भुगतान कर दिया।
15 मई 2026: पूर्व पार्षद के बताए अनुसार अकाउंट/फोन नंबर पर ऑनलाइन माध्यम से 50,000 रुपये ट्रांसफर किए गए।
16 मई 2026: पूर्व पार्षद के निर्देश पर साडा कॉलोनी स्थित यूको बैंक के सामने उसके भेजे अज्ञात व्यक्ति को 1,00,000 रुपये नकद सौंपे गए।
पूर्व पार्षद ने पूरा भरोसा दिलाया था कि रकम मिलते ही कानूनी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। लेकिन 17 मई 2026 को बांकी मोंगरा पुलिस सुरेश चंद के घर पहुंची और बेटे साहिल कुमार को पूछताछ के लिए थाने ले आई। इसके बाद उसे गिरफ्तार कर कटघोरा कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे कटघोरा जेल भेज दिया गया।
30 हजार लौटाए, बाकी मांगने पर दी धमकी: "जो करना है कर लो"
बेटे के जेल जाने से व्यथित पिता ने जब पूर्व पार्षद रविन्द्र मोहन बघेल से संपर्क किया और सवाल पूछा कि रकम लेने के बाद भी गिरफ्तारी कैसे हो गई, तो पूर्व पार्षद ने बहाना बनाया कि "जिन्हें पैसे दिए हैं उनसे वापस लेकर लौटा दूंगा।"
19 मई 2026 को: पूर्व पार्षद ने दबाव बनाने पर 30,000 रुपये वापस किए।
शेष 1,20,000 रुपये लौटाने में वह लगातार टालमटोल करता रहा।
अंतिम इनकार: जब पीड़ित ने शेष राशि की बार-बार मांग की, तो आरोपी पूर्व पार्षद ने साफ कह दिया कि "मैं 1,20,000 रुपये नहीं लौटाऊंगा, जो करना है कर लो।"
- पेन ड्राइव में ऑडियो-वीडियो सबूत सौंपकर एसपी से न्याय की गुहार
ठगी का अहसास होने पर आवेदक सुरेश चंद ने 31 जुलाई 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय कोरबा में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत पत्र के साथ पूर्व पार्षद रविन्द्र मोहन बघेल से हुई बातचीत का वॉयस एवं वीडियो रिकॉर्डिंग पेन ड्राइव में संलग्न कर पुलिस को सौंपा गया है।
मामले की प्रतिलिपि पुलिस महानिरीक्षक (IG) बिलासपुर रेंज और थाना प्रभारी बांकी मोंगरा को भी उचित कानूनी कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई है।
न्यूज पोर्टल का बड़ा सवाल: क्या थानों के आसपास सक्रिय है कोई 'दलाल नेटवर्क'?
इस घटना ने कोरबा जिले के पुलिस तंत्र और आम जनता की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:
क्या पुलिस के नाम पर दलाली का बड़ा खेल चल रहा है? पूर्व पार्षद द्वारा खुलेआम 'थानों में उठना-बैठना' और 'पुलिस अधिकारियों से काम कराने' के नाम पर डेढ़ लाख रुपये वसूल लेना इस बात का संकेत है कि थानों के आसपास बिचौलिए सक्रिय हैं।
कड़ी जांच की आवश्यकता: पुलिस को इस मामले में केवल 1.20 लाख की ठगी के कोण से ही नहीं, बल्कि इस बात की भी जांच करनी चाहिए कि क्या इस कथित लेनदेन में पुलिस विभाग का कोई अंदरूनी व्यक्ति या अन्य दलाल नेटवर्क भी शामिल था।
आम जनता में विश्वास बहाल करने की चुनौती: पुलिस प्रशासन को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि किसी भी आपराधिक मामले में राहत दिलाने या कार्रवाई रुकवाने के नाम पर बाहरी बिचौलियों की कोई भूमिका नहीं होती।
जिला कोरबा पुलिस अधीक्षक को शिकायत और डिजिटल सबूत सौंपे जाने के बाद अब देखना होगा कि बांकी मोंगरा पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन पूर्व पार्षद रविन्द्र मोहन बघेल एवं उसके सहयोगियों के खिलाफ क्या वैधानिक कदम उठाता है।


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