कोरबा (छत्तीसगढ़):
शहर के चिमनीभट्ठा (वार्ड क्रमांक-14) में शादी का माहौल था, गाजे-बाजे के साथ बारात पहुंच चुकी थी और मंडप भी सजकर तैयार था। लेकिन फेरे होने ही वाले थे कि महिला एवं बाल विकास विभाग और मानिकपुर चौकी पुलिस की संयुक्त टीम ने दबिश देकर शादी की रस्मों पर ब्रेक लगा दिया।
टीम को मौके पर देखते ही वैवाहिक कार्यक्रम में हड़कंप मच गया और रिश्तेदार घबरा गए।
💘 बच्चों की 'जिद' के आगे झुके थे परिजन
जानकारी के मुताबिक, वार्ड 14 की एक ही बस्ती में रहने वाले 13 वर्षीय नाबालिग लड़की और 15 वर्षीय लड़के के बीच पसंद का मामला था। दोनों शादी करने की जिद पर अड़े हुए थे। बच्चों की इसी जिद के कारण परिजनों ने भी सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार उनका विवाह कराने का फैसला कर लिया था।
🚨 अधिकारियों ने दी कानून और इसके दुष्परिणामों की सीख
महिला एवं बाल विकास अधिकारी बसंत मिंज के नेतृत्व में पहुंची टीम ने दोनों पक्षों के परिजनों को बैठाकर कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।
कानूनी नियम: लड़की की उम्र न्यूनतम 18 वर्ष और लड़के की उम्र 21 वर्ष होना अनिवार्य है। इससे कम उम्र में शादी कराना कानूनन अपराध है।
दुष्परिणाम: कम उम्र में शादी से बच्चों के शारीरिक, मानसिक विकास और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर असर के बारे में समझाया गया।
🤝 बिना शादी के वापस लौटी बारात
अधिकारियों और पुलिस की कड़ी समझाइश के बाद दोनों पक्ष बाल विवाह न कराने के लिए राजी हो गए। इसके बाद:
बारात बिना शादी की रस्मों के वापस लौट गई।
नाबालिग दूल्हा और दुल्हन को उनके संबंधित घरों में सुरक्षित भेज दिया गया।
🗣️ अधिकारी का बयान:
"बाल विवाह की गुप्त सूचना मिलते ही हमारी टीम ने मानिकपुर चौकी पुलिस के साथ त्वरित कार्रवाई की। दोनों परिवारों को जागरूक कर विवाह रुकवाया गया है। बाल विवाह एक सामाजिक और कानूनी अपराध है, इसे जिले में किसी भी कीमत पर होने नहीं दिया जाएगा।"
— बसंत मिंज, महिला एवं बाल विकास अधिकारी

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