तरदा गांव के किराए के मकान में अवैध रूप से डंप की जा रही थीं भारी मात्रा में प्रयुक्त सिरिंज, दवाइयां और मेडिकल वेस्ट; ग्रामीणों में भारी आक्रोश, स्वास्थ्य और पर्यावरण विभाग ने शुरू की जांच।
कोरबा। जिले के उरगा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तरदा गांव में उस समय हड़कंप मच गया, जब एक बंद पड़े मकान से भयंकर दुर्गंध उठने लगी। पिछले कई दिनों से लगातार आ रही इस बदबू से स्थानीय ग्रामीणों का जीना मुहाल हो गया था। गुरुवार को जब बदबू असहनीय हो गई और आसपास रहना नामुमकिन हो गया, तो परेशान ग्रामीणों ने एकजुट होकर मौके पर धावा बोला और बंद मकान का दरवाजा खुलवाया। अंदर का नजारा देखते ही सबके होश उड़ गए।
मकान के भीतर भारी मात्रा में मेडिकल वेस्ट (अस्पतालीय कचरा) लावारिस हालत में पड़ा हुआ था। थैलियों में बड़ी संख्या में प्रयुक्त इंजेक्शन, सिरिंज, दवाओं की खाली शीशियां और अन्य खतरनाक मेडिकल कचरा भरा हुआ मिला। रिहायशी इलाके के बीचों-बीच इस तरह महामारी को न्योता देने वाली गंदगी देखकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मौके पर ही कड़ा विरोध जताया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत उरगा थाना पुलिस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमें फौरन मौके पर पहुंचीं।
📌 मेडिकल वेस्ट के 'अस्थायी स्टोरेज' के नाम पर खेल, बिलासपुर की कंपनी पर आरोप
प्रारंभिक जांच और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले के तार एक बड़ी लापरवाही से जुड़े हैं। जिले के सरकारी और निजी अस्पतालों से निकलने वाले बायो-मेडिकल वेस्ट के सुरक्षित उठाव और निष्पादन का ठेका बिलासपुर की 'एनवायरो केयर' कंपनी को मिला हुआ है। नियमानुसार कंपनी को प्रतिदिन अस्पतालों से यह कचरा एकत्र कर बिलासपुर के सेंदरी गांव स्थित मेडिकल वेस्ट डिस्पोजल प्लांट में ले जाकर नष्ट करना होता है।
कंपनी से जुड़े सूत्रों का दावा है कि तरदा गांव के इस मकान को अस्थायी स्टोरेज के रूप में किराए पर लिया गया था। उनका तर्क है कि गाड़ी खराब होने या अन्य आपातकालीन स्थिति में कचरे को यहाँ एक दिन रोककर अगले दिन बिलासपुर भेजने की व्यवस्था बनाई गई थी। हालांकि, उचित प्रबंधन और सुरक्षा मानकों की कमी के कारण यह कचरा लगातार जमा होता गया, जिसने पूरे इलाके में जहरीली दुर्गंध फैला दी।
🩺 स्वास्थ्य विभाग सख्त, जिला स्वास्थ्य अधिकारी बोले- 'होगी कड़ी कार्रवाई'
इस संवेदनशील मामले को प्रशासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एसएन केसरी ने स्पष्ट किया कि आवासीय क्षेत्र में इस तरह का कचरा डंप करना नियमों के खिलाफ और जनस्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने कहा, "पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष टीम मौके पर भेज दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।"
🌱 पर्यावरण विभाग की अनुमति पर उठे सवाल: बिना NOC के चल रहा था गोदाम?
मामले में अब पर्यावरण विभाग भी सख्त रुख अपना रहा है। पर्यावरण अधिकारी प्रसन्न सोनकर ने नियमों का हवाला देते हुए बताया कि बायो-मेडिकल वेस्ट को किसी भी स्थान पर स्टोर करने या उसका केंद्र बनाने के लिए पर्यावरण विभाग की अनुमति (NOC) लेना अनिवार्य है। जांच में इस बात की भी गहनता से तफ्तीश की जा रही है कि संबंधित कंपनी ने इस घनी आबादी वाले स्थान पर खतरनाक कचरा रखने की कोई आवश्यक अनुमति ली थी या नहीं।
वर्तमान स्थिति: फिलहाल उरगा थाना पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारी संयुक्त रूप से मामले की जांच कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ की धाराओं के तहत आगे की कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।



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