फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद की जिला एवं सत्र अदालत ने एक जघन्य हत्या मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 18 महीने के मासूम की निर्मम हत्या के दोषी को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (Rarest of Rare) की श्रेणी में रखते हुए दोषी पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। घटना के केवल 40 दिनों के भीतर फैसला आने से यह मामला न्यायिक प्रक्रिया की तेज़ रफ्तार का उदाहरण बन गया है।
•पोस्टमार्टम रिपोर्ट: पहली ही पटक में टूट गई थी गर्दन
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• माँ की गुहार : हत्यारे को मेरे सामने फांसी दो
30 मई 2026 को शिकोहाबाद क्षेत्र की यादव कॉलोनी में हुई इस वारदात में आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने कथित तौर पर अपने 18 महीने के भतीजे आरव को टॉफी दिलाने का झांसा देकर घर से बाहर ले गया। आरोप है कि उसने रास्ते में बच्चे को कई बार जमीन पर पटक दिया, जिससे गंभीर रूप से घायल मासूम की अस्पताल में मौत हो गई। पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी, जिसने जांच में अहम साक्ष्य का काम किया।
पुलिस ने मामले की जांच तेजी से पूरी करते हुए महज छह दिनों के भीतर अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग की अदालत में लगातार सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष ने 13 गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप सिद्ध किए, जिसके बाद अदालत ने उसे मृत्युदंड सुनाया।
जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी अपने भाई की पत्नी से एकतरफा प्रेम करता था और विवाह करना चाहता था। प्रस्ताव अस्वीकार होने के बाद उसने मासूम बच्चे को अपनी राह की बाधा मानते हुए इस वारदात को अंजाम दिया।
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी ने पूरी घटना को अत्यंत क्रूरता और सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि ऐसे अपराध समाज की संवेदनाओं को झकझोर देते हैं और इस प्रकार के मामलों में कठोरतम दंड ही न्याय के हित में है।
अदालती सूत्रों के अनुसार, सजा सुनाए जाने के बाद दोषी अदालत में भावुक हो गया और रोने लगा। वहीं पीड़ित परिवार ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की बड़ी जीत बताया।




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