बांकीमोंगरा (कोरबा) | आस्था का समंदर, ढोल-मंजीरों की थाप, शंखनाद की पावन ध्वनि और 'जय जगन्नाथ' का गगनभेदी जयघोष... कुछ ऐसा ही विहंगम नजारा था बांकीमोंगरा नगर का, जहां भगवान श्री जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा और पूरे उत्साह के साथ निकाली गई। उत्कल समाज के तत्वावधान में आयोजित इस महापर्व में पूरा नगर भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया।
शांति नगर से सनसाइन स्कूल तक बिखरे भक्ति के रंग
कल दिनांक 16 जुलाई को रथ यात्रा का आगाज शांति नगर से हुआ। भगवान श्री जगन्नाथ, भइया बलभद्र और बहन सुभद्रा की आकर्षक रूप से सुसज्जित प्रतिमाओं का भक्तों ने पूरे विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। इसके बाद जैसे ही रथ के पहिए आगे बढ़े, श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया।
यात्रा का रूट: शांति नगर ➡️ बांकीमोंगरा मेन चौक ➡️ सनसाइन स्कूल फिर मैं चौक।
खास आकर्षण: पारंपरिक भजन-कीर्तन, धार्मिक गीत और कदम-कदम पर होती पुष्पवर्षा।
🙌 आस्था की डोर: बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने खींचा रथ
"भगवान जगन्नाथ के रथ की डोरी को छूना और खींचना ही अपने आप में मोक्ष का मार्ग है।" इसी अटूट विश्वास के साथ महिलाओं, युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने बढ़-चढ़कर रथ खींचा।
पूरे मार्ग में स्थानीय नागरिकों ने जगह-जगह रथ को रोककर महाप्रभु की आरती उतारी। तपती धूप और गर्मी के बीच भी भक्तों की आस्था डिगी नहीं। सेवाभाव की मिसाल पेश करते हुए कई सामाजिक संगठनों और नागरिकों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और महाप्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई थी।
🤝 समरसता और भाईचारे का संदेश
उत्कल समाज के पदाधिकारियों ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:
"यह रथ यात्रा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह समाज को एक सूत्र में पिरोने, आपसी प्रेम, भाईचारा और मानवता का संदेश देने का महापर्व है।"
👮 मुस्तैद रही सुरक्षा, अनुशासन की दिखी मिसाल
इतनी भारी भीड़ के बावजूद पूरा आयोजन बेहद अनुशासित और शांतिपूर्ण रहा। पुलिस प्रशासन और आयोजन समिति की सजगता के कारण यातायात और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही, जिससे किसी भी श्रद्धालु को असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।
चलते-चलते:
बांकीमोंगरा में संपन्न हुई इस अलौकिक रथ यात्रा ने न केवल नगरवासियों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया, बल्कि सामाजिक एकता की एक नई मिसाल भी कायम की। श्रद्धालुओं ने महाप्रभु से क्षेत्र की सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

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