बांकी मोंगरा | डिजिटल न्यूज़ डेस्क
कागज़ों पर विकास की चमचमाती तस्वीरें और धरातल पर घुटनों तक भरा पानी... बांकी मोंगरा नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक 25 से 30 की जमीनी हकीकत कुछ ऐसी ही है। थोड़ी सी बारिश क्या हुई, यहाँ की सड़कें तालाब और गलियाँ कीचड़ के दलदल में तब्दील हो गईं।
हालत यह है कि यह रास्ता सिर्फ आम लोगों की परीक्षा नहीं ले रहा, बल्कि गेवरा क्षेत्र के प्रमुख स्कूलों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग होने के कारण रोज़ाना सैकड़ों मासूम बच्चों की जान भी जोखिम में डाल रहा है।
⚠️ 'खतरे का सफर': रोज़ खिसक रही दोपहिया गाड़ियों की ग्रिप
स्कूल की ड्रेस, कंधों पर भारी बस्ता और नीचे फिसलन भरा दलदल! रोज़ सुबह-शाम छात्र-छात्राएं इसी खौफ़नाक रास्ते से होकर गुज़रने को मजबूर हैं।
"हमने अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक, हर किसी का दरवाजा खटखटाया है। पर लगता है जिम्मेदार आँखें मूंदकर किसी बड़े हादसे का इंतज़ार कर रहे हैं।"
— शालिक राम दुबे, स्थानीय निवासी
गड्ढों और जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों का फिसलकर गिरना यहाँ रोज़मर्रा की बात बन चुकी है।
🔍 धरातल पर क्यों फेल हुए 'विकास' के दावे?
अधूरा इंफ्रास्ट्रक्चर: सड़कों के निर्माण में गुणवत्ता की कमी और मरम्मत में बरती जा रही लापरवाही।
ठप्प ड्रेनेज सिस्टम: पानी की निकासी न होने के कारण हल्की बारिश में भी सड़क पर तालाब जैसा जलभराव।
जनप्रप्रतिनिधियों की खामोशी: बार-बार गुहार लगाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार बेपरवाह।
❓ तीखे सवाल: आखिर कब जागेगा नगर पालिका प्रशासन?
क्या प्रशासन को किसी बड़ी दुर्घटना का इंतज़ार है?
क्या वार्ड 25 से 30 के नागरिकों को सिर्फ टैक्स देने का अधिकार है, मूलभूत सुविधाओं का नहीं?
स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए तात्कालिक एक्शन प्लान क्यों नहीं बनाया जा रहा?
पोर्टल की टेक: बुनियादी सुविधा पाना हर नागरिक का हक़ है। जब तक बांकी मोंगरा की इन बदहाल सड़कों की मरम्मत और जल निकासी की व्यवस्था नहीं हो जाती, हम जनता की इस आवाज़ को प्रशासन के कानों तक पहुँचाते रहेंगे!



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