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दिल्ली के जंतर-मंतर पर गर्जे कोरबा के भू-विस्थापित, युवा कांग्रेस ने खोला SECL और केंद्र के खिलाफ मोर्चा

कोरबा :– छत्तीसगढ़ के ऊर्जाधानी कहे जाने वाले कोरबा जिले के भू-विस्थापितों की आवाज अब देश की राजधानी दिल्ली में गूंज रही है। South Eastern Coalfields Limited (SECL) और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ शनिवार को युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर जोरदार प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान “चौकीदार को बोलो, मालिक आए हैं” और “SECL जवाब दो” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

📌 प्रदर्शन की प्रमुख बातें:

आंदोलन का नेतृत्व: युवा कांग्रेस के ग्रामीण जिला अध्यक्ष विकास सिंह और उनके साथियों ने मोर्चा संभाला।

मुख्य मुद्दे: वर्षों से लंबित मुआवजा, सही पुनर्वास, स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार और खदानों से बढ़ता भयावह प्रदूषण।

राष्ट्रीय मंच पर लड़ाई: नेताओं का कहना है कि कोरबा का संघर्ष अब सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है।

💬 'देश को बिजली देने वाले खुद अंधेरे में जीने को मजबूर'

प्रदर्शन में शामिल युवा कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार और SECL प्रबंधन पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा:

"कोरबा से निकलने वाला कोयला पूरे देश को रोशन करता है, लेकिन वहां के मूल निवासी आज विस्थापन, जहरीली हवा और बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। जमीनों का अधिग्रहण तो कर लिया गया, लेकिन वादे के मुताबिक न तो उचित मुआवजा मिला और न ही रोजगार।"

— विकास सिंह (ग्रामीण जिला अध्यक्ष, युवा कांग्रेस)

📋 मांगें और आगे की चेतावनी

1.लंबित मुआवजे और पुनर्वास मामलों का तुरंत निस्तारण हो।

2.खदान प्रभावित स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता से रोजगार दिया जाए।

3.कोयला खदानों से उड़ती धूल और प्रदूषण पर रोक लगाने हेतु कड़े कदम उठाए जाएं।

बड़ी चेतावनी: युवा कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यदि SECL प्रबंधन और केंद्र सरकार ने जल्द ही इन मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकाला, तो इस आंदोलन को उग्र रूप दिया जाएगा और इसे देशभर में फैलाया जाएगा।


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