रखरखाव के अभाव में उजड़ता जा रहा क्षेत्र का प्रमुख सार्वजनिक स्थल, एसईसीएल और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बांकीमोंगरा। कभी बच्चों की हंसी-खुशी, युवाओं की चहल-पहल और सुबह-शाम टहलने वाले लोगों से गुलजार रहने वाला बांकीमोंगरा का एसईसीएल गार्डन आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिस परिसर में कभी लोग परिवार के साथ समय बिताने और मनोरंजन के लिए पहुंचते थे, वहां अब जगह-जगह कचरे का ढेर और प्लास्टिक की पन्नियां नजर आ रही हैं।
क्षेत्र का यह प्रमुख गार्डन लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए मनोरंजन और स्वास्थ्य गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां बच्चों के खेलने से लेकर लोगों के टहलने और व्यायाम करने तक की सुविधाएं उपलब्ध थीं। लेकिन समय के साथ इसके रखरखाव पर ध्यान कम होता गया और अब इसकी हालत लगातार खराब होती जा रही है।
खदानें बंद हुईं तो क्या गार्डन की जिम्मेदारी भी भूला प्रबंधन?
स्थानीय लोगों का कहना है कि बांकीमोंगरा क्षेत्र में एसईसीएल की गतिविधियां और खदानें धीरे-धीरे कम होने के साथ ही गार्डन की देखरेख भी प्रभावित हुई है। नियमित साफ-सफाई, मरम्मत और सौंदर्यीकरण के अभाव में गार्डन की व्यवस्था चरमराती चली गई।
गार्डन के जीर्णोद्धार और विकास की मांग समय-समय पर जनप्रतिनिधियों तथा स्थानीय नागरिकों द्वारा उठाई जाती रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नजर नहीं आया है।
गार्डन या कचरा डंपिंग स्थल?
सबसे गंभीर सवाल गार्डन परिसर में कचरा फेंके जाने को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक एसईसीएल कॉलोनी क्षेत्र से निकलने वाला कचरा यहां पहुंच रहा है। इसके अलावा सफाई व्यवस्था से जुड़े लोगों द्वारा भी कचरा डाले जाने की शिकायत सामने आ रही है।
नगर पालिका परिषद क्षेत्र से निकलने वाले कचरे को भी गार्डन परिसर में फेंके जाने की बात कही जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
कचरे के कारण पूरे परिसर में दुर्गंध फैलने के साथ-साथ गार्डन का वातावरण भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सवाल यह है कि जिस स्थान को लोगों के स्वास्थ्य और मनोरंजन का केंद्र होना चाहिए, वह आखिर कचरा जमा करने की जगह कैसे बन गया?
कचरे में भोजन तलाश रहे मवेशी, प्लास्टिक बना जानलेवा खतरा
गार्डन में बिखरी प्लास्टिक की पन्नियां और अन्य कचरा सिर्फ इंसानों के लिए परेशानी नहीं है। यहां घूमने वाले मवेशी भी कचरे के बीच भोजन तलाशते नजर आते हैं और प्लास्टिक निगलने का खतरा बना रहता है।
यह स्थिति पर्यावरण के साथ-साथ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।
लोगों की मांग—सिर्फ सफाई नहीं, हो पूरा कायाकल्प
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि गार्डन को केवल कचरा हटाकर छोड़ देना पर्याप्त नहीं होगा। यहां नियमित सफाई व्यवस्था, पेड़-पौधों का संरक्षण, जर्जर हिस्सों की मरम्मत, बच्चों के लिए खेल सुविधाएं और लोगों के लिए बेहतर वॉकिंग व व्यायाम व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है।
नागरिकों की मांग है कि एसईसीएल प्रबंधन और नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा आपसी समन्वय से गार्डन के संरक्षण और विकास की ठोस योजना तैयार करें।
पुरानी रौनक लौटने का इंतजार
बांकीमोंगरा का यह गार्डन कभी क्षेत्र की पहचान हुआ करता था। अब स्थानीय लोगों को इंतजार है कि जिम्मेदार विभाग इसकी सुध लें और इसे फिर से ऐसा सार्वजनिक स्थल बनाएं, जहां कचरे के ढेर की जगह बच्चों की किलकारियां सुनाई दें और क्षेत्रवासी बेझिझक सुबह-शाम सैर और मनोरंजन के लिए पहुंच सकें।
अब देखना होगा कि एसईसीएल प्रबंधन और नगर पालिका परिषद इस बदहाल गार्डन की तस्वीर बदलने के लिए कब ठोस कदम उठाते हैं।



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