नोटिस के बाद भी नहीं हटा था अतिक्रमण
निगम अधिकारियों के अनुसार, आनंद बाजार में पिछले कई वर्षों से सड़क किनारे व्यवसाय कर रहे ठेला और गुमटी संचालकों को पहले ही मुनादी और नोटिस के जरिए हिदायत दी गई थी। इन अवैध कब्जों के कारण क्षेत्र में यातायात व्यवस्था चरमरा गई थी और पैदल चलने वाले राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। नोटिस की अवधि बीत जाने के बाद भी जब अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तब प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया।
पुलिस की मौजूदगी में सख्त कार्रवाई
यह पूरी कार्रवाई तोड़ू दस्ता प्रभारी विकास तिवारी के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात रहा। टीम ने मौके से आधा दर्जन से अधिक अवैध दुकानों को जमींदोज और बेदखल किया। इस दौरान जो कब्जाधारी मौके पर उपस्थित नहीं थे, उनका सामान जब्त कर निगम कार्यालय भिजवा दिया गया।
विस्थापितों का पुनर्वास: सर्वसुविधायुक्त दुकानों का आवंटन
कार्रवाई के साथ-साथ नगर निगम ने प्रभावित दुकानदारों के पुनर्वास की भी सराहनीय मिसाल पेश की है। वर्षों से सड़क किनारे दुकान लगाने वाले पात्र दुकानदारों को आनंद बाजार में ही नवनिर्मित एक दर्जन से अधिक सर्वसुविधायुक्त पक्की दुकानों का आवंटन किया गया।
तोड़ू दस्ता प्रभारी विकास तिवारी ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा, "व्यवस्थित दुकानें मिलने से स्थानीय छोटे व्यापारियों को बेहतर व्यापारिक सुविधाएं मिलेंगी और साथ ही शहर का ट्रैफिक भी सुचारू रूप से चल सकेगा। मुख्य सड़कों को अतिक्रमण मुक्त करने का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा"।
कुछ दुकानदारों ने उठाई वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
निगम की इस कार्रवाई के बीच, जिन दुकानदारों को नई दुकानों के आवंटन की सूची में जगह नहीं मिल पाई, उनमें थोड़ी मायूसी देखी गई। दुकान आवंटन से वंचित रह गए ऐसे कुछ व्यवसायियों ने निगम प्रशासन से गुहार लगाई है कि उनके रोजगार को ध्यान में रखते हुए उनके लिए भी जल्द से जल्द कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।




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