बांकी मोगरा। सनसाइन स्कूल में दो दिन पहले छात्रों के दो गुटों के बीच हुई मारपीट का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल सामने आने लगे हैं। छात्रों के विवाद के बाद दोनों पक्षों के परिजन थाना पहुंचे, जहां आपसी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने शिकायत वापस लेकर बच्चों को समझाइश देने पर सहमति जताई। पुलिस ने भी छात्रों को समझाइश देकर वापस भेज दिया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान स्कूल परिसर की स्थिति ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्पष्ट है कि छात्रों के बीच विवाद के बाद स्कूल प्रबंधन द्वारा तत्काल पुलिस को सूचना नहीं दी गई और करीब 24 घंटे बाद, वह भी परिजनों के दबाव के बाद थाने में सूचना देने की प्रक्रिया शुरू हुई। यदि यह आरोप सही है तो सवाल उठता है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े मामले को स्कूल प्रबंधन ने तत्काल गंभीरता से क्यों नहीं लिया?
जर्जर छत और सीपेज के बीच पढ़ाई
स्कूल परिसर में निरीक्षण के दौरान सामने आई कथित स्थिति सबसे अधिक चिंता बढ़ाने वाली है। कई कक्षाओं में सफाई व्यवस्था बदहाल नजर आने की बात सामने आई है। वहीं कुछ कमरों में सीपेज के कारण पानी टपकने की शिकायत भी सामने आई।
कक्षाओं की छतों की स्थिति भी चिंताजनक बताई जा रही है। कई जगह छत के हिस्से जर्जर होकर टूटते दिखाई देने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल यह है कि इन कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
खिड़कियों पर सुरक्षा का अभाव, बाहर झाड़ियां बनीं चिंता का कारण
कक्षाओं की कुछ खिड़कियों में दरवाजे या पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने की बात भी सामने आई है। खिड़कियों के बाहर बड़ी-बड़ी जंगली घास और पौधे दिखाई देने से विद्यार्थियों के लिए संभावित खतरे को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या को देखते हुए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि विद्यालय परिसर में नियमित सफाई, भवन रखरखाव और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी आखिर किस स्तर पर की जा रही है।
बाथरूम की हालत पर भी उठे सवाल
विद्यालय के बाथरूम की कथित बदहाल स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। देख गया कि बाथरूम विद्यालय के पीछे है जहां तक जाने के लिए बड़े बड़े खास पौधे से होकर जाना पड़ता है जो किसी भी वक्त बड़ी अनहोनी को न्योता देने जैसा है, स्वच्छता और रखरखाव की स्थिति विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सम्मानजनक वातावरण के अनुरूप नहीं दिखाई देती।
यदि विद्यालय में बच्चों से नियमित रूप से पढ़ाई कराई जा रही है तो मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता और उनकी साफ-सफाई सुनिश्चित करना स्कूल प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
विद्यालयों के रखरखाव, साफ-सफाई, मूलभूत सुविधाओं और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए विभागीय स्तर पर मिलने वाली राशि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि सनसाइन स्कूल को किसी मद में विकास या रखरखाव के लिए फंड प्राप्त होता है, तो जर्जर छत, सीपेज, गंदगी, खराब बाथरूम और सुरक्षा संबंधी कमियां अब तक दूर क्यों नहीं की गईं? वहीं यदि पर्याप्त राशि उपलब्ध नहीं होती है तो क्या स्कूल प्रबंधन ने संबंधित विभाग से इसकी मांग की है? ऐसे में स्कूल को प्राप्त होने वाले फंड, उसके मदवार उपयोग और कराए गए कार्यों का विवरण सामने आना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि विद्यार्थियों की मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों का उपयोग किस प्रकार किया जा रहा है।
शिक्षकों ने भी वेतन को लेकर जताई नाराजगी
मामले के दौरान कुछ शिक्षकों की ओर से कथित तौर पर दो-दो महीने से वेतन नहीं मिलने की बात भी सामने आई। यदि यह दावा सही है तो यह भी गंभीर प्रशासनिक विषय है। शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलने की स्थिति में इसका सीधा असर विद्यालय के संचालन और शिक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है।
शाला विकास समिति और शिक्षा विभाग की भूमिका पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विद्यालय भवन, सफाई, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं को लेकर लंबे समय से समस्याएं मौजूद हैं, तो शाला विकास समिति और संबंधित शिक्षा विभाग की ओर से अब तक क्या निरीक्षण और कार्रवाई की गई?
क्या स्कूल का नियमित निरीक्षण होता है?
क्या जर्जर भवन की स्थिति की जांच की गई है?
क्या विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए कोई व्यवस्था तय है?
क्या शिक्षकों को समय पर वेतन मिल रहा है?
और यदि कमियां मिली हैं तो उन्हें दूर करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए?
प्राचार्य से जवाब मांगने पर स्पष्टता का अभाव
स्कूल के प्राचार्य सुरेश सर से जब विद्यालय की व्यवस्थाओं और सामने आई शिकायतों को लेकर सवाल किया गया तो उनके जवाब को लेकर भी स्पष्टता नहीं मिलने की बात सामने आई। ऐसे में स्कूल प्रबंधन से अपेक्षा है कि वह सामने आए सभी सवालों का स्पष्ट जवाब दे और विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर अभिभावकों के बीच बनी चिंता को दूर करे।
छात्रों के बीच विवाद किसी भी स्कूल में हो सकता है, लेकिन विवाद से कहीं अधिक गंभीर सवाल तब खड़े होते हैं जब विद्यालय परिसर में बच्चों की सुरक्षा, स्वच्छता, भवन की मजबूती और मूलभूत सुविधाओं को लेकर शिकायतें सामने आएं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि शिक्षा विभाग और शाला विकास समिति इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर विद्यालय का निरीक्षण करती है या नहीं। क्योंकि सवाल सिर्फ एक विवाद का नहीं, बल्कि स्कूल में पढ़ने वाले सैकड़ों विद्यार्थियों की सुरक्षा और उनके भविष्य का है।







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