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पालिका करती गार्डन की सफाई, SECL सफाई विभाग फिर डाल देती है कचरे का अंबार!

सफाई के कुछ दिनों बाद ही दोबारा डंपिंग, बदहाली पर भड़के लोग; बोले—“आगे पाठ, पीछे सपाट”, आखिर कब होगा गार्डन का कायाकल्प?



बांकीमोंगरा। कभी बच्चों की किलकारियों, युवाओं की चहल-पहल और सुबह-शाम टहलने वाले लोगों से गुलजार रहने वाला बांकीमोंगरा का एसईसीएल गार्डन आज अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां कर रहा है। जिस परिसर को क्षेत्रवासियों के मनोरंजन, स्वास्थ्य और सुकून का केंद्र होना चाहिए था, वहां अब जगह-जगह कचरे के ढेर, प्लास्टिक की पन्नियां और गंदगी नजर आ रही है।


सबसे गंभीर सवाल गार्डन परिसर में कचरा फेंके जाने को लेकर उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एसईसीएल कॉलोनी क्षेत्र से निकलने वाला कचरा गार्डन के आसपास पहुंचाया जा रहा है। इतना ही नहीं, सफाई व्यवस्था से जुड़े लोगों द्वारा भी यहां कचरा डाले जाने की शिकायत सामने आ रही है।

पालिका ने सफाई कराई, कुछ ही दिनों में फिर से बना दिया कचरे का पहाड़


हाल ही में नगर पालिका परिषद द्वारा गार्डन के सामने वाले हिस्से में जमा कचरे की सफाई करवाई गई थी। लोगों को उम्मीद जगी थी कि शायद अब इस सार्वजनिक स्थल की तस्वीर बदलेगी और गार्डन को दोबारा व्यवस्थित करने की दिशा में कदम बढ़ेंगे।

लेकिन सफाई के कुछ ही दिनों बाद फिर वही तस्वीर सामने आ गई। स्थानीय लोगों के मुताबिक, एसईसीएल के सफाई विभाग की ओर से दोबारा यहां कचरा डाला जाने लगा और देखते ही देखते पहले से भी बड़े पैमाने पर कचरे का अंबार खड़ा हो गया।

ऐसे में क्षेत्रवासियों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि जब नगर पालिका सफाई कर रही है, तो उसके बाद दोबारा कचरा आखिर कौन और क्यों डाल रहा है?

“एक तरफ सफाई, दूसरी तरफ डंपिंग”—व्यवस्था पर उठे सवाल


मौजूदा स्थिति को देखकर लोगों का कहना है कि एक तरफ पालिका सफाई कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कचरा फिर उसी जगह पहुंच रहा है। ऐसे में पालिका की मेहनत और सरकारी संसाधनों से होने वाली सफाई दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों की नाराजगी इस बात को लेकर भी है कि यदि सफाई के बाद दोबारा उसी स्थान पर कचरा डाल दिया जाएगा, तो समस्या का स्थायी समाधान कैसे होगा?

गार्डन का जीर्णोद्धार अब भी सपना?

कभी क्षेत्र का प्रमुख सार्वजनिक स्थल माना जाने वाला यह गार्डन आज रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे अपनी पहचान खोता जा रहा है। लोगों का कहना है कि गार्डन के जीर्णोद्धार और बेहतर रखरखाव की उम्मीद लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन जमीनी हालात देखकर लगता है कि गार्डन का कायाकल्प अभी भी महज सपना बनकर रह गया है।

कचरे और गंदगी के कारण पूरे परिसर में दुर्गंध फैल रही है। इससे न केवल आसपास का वातावरण प्रभावित हो रहा है, बल्कि यहां आने वाले लोगों और आवारा पशुओं के स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।


लोगों की मांग—सिर्फ कचरा हटाना नहीं, पूरा कायाकल्प चाहिए

क्षेत्रवासियों का कहना है कि समस्या का समाधान केवल एक-दो बार सफाई करवाने से नहीं होगा। गार्डन की स्थायी सफाई व्यवस्था, नियमित निगरानी, कचरा डंपिंग पर रोक और पूरे परिसर का जीर्णोद्धार जरूरी है।

लोग चाहते हैं कि संबंधित विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय मिलकर इस सार्वजनिक स्थल की तस्वीर बदलने के लिए ठोस कदम उठाएं।

अब बड़ा सवाल यही है—

क्या बांकीमोंगरा का यह गार्डन फिर से बच्चों की किलकारियों और लोगों की चहल-पहल से गुलजार होगा, या कचरे के अंबार के बीच इसके कायाकल्प का सपना यूं ही अधूरा रहेगा?


फिलहाल आज फिर से नगर पालिका परिषद द्वारा सफाई कराई जा रही है,,, पर अब देखना है कब तक रहेगी सफाई
।

क्षेत्रवासियों की नजर अब SECL और नगर पालिका की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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